Wednesday, 1 February 2012

ज्ञान की नींव

 ज्ञान  की नींव को हमें डालना है ,
,अतीत से सबक लेकर भविष्य को बनाना है,
विदेश में न  जाकर देश को बचाना है  
शिक्षा की गरिमा को ,
 परिश्रम की मिट्टी को 
मजबूती  से बनाना है
सामाजिक दायित्व को निभाना है 
ज्ञान की नींव को हमें डालना है
अनगिनत चाँद सितारों मे
  दुनिया के अंधकारो को
सूरज के प्रकाश से 
लोगो के चेतन को जगाना है
अपने अटल विश्वास से लक्ष्य को पाना है 
ज्ञान की नींव को हमें डालना है 
अतीत से सबक लेकर भविष्य को बनाना है
  जन- जन में ज्ञान की ज्योति को जलाना है
 अतसी को मिटाना है
अभीति को अपनाना है 
देश के  लिए कुछ हमें कर गुजरना है 
ज्ञान की नींव को हमें डालना है 
अतीत से सबक लेकर भविष्य को बनाना है 
उच्च शिक्षा को पाना है  देश को समृद्ध बनाना है
ज्ञान की  नींव को हमें डालना है
 अतीत से सबक लेकर भविष्य को बनाना है,,





Tuesday, 31 January 2012

आज का युवा

दुनिया से तुमने लिया हमेशा,
  क्षण   भर के लिया 
दुनिया को दिया क्या ? 
स्वयं  में विलीन रहकर,
स्वयं के लिए सोचा हमेशा
युवा हो पर गर्व बढाया,
लोगो की रहो में अंगारे  बिछाये 
युवा होने पर मान बढाया 
कूटनीति को दिया  बढावा 
अन्तकाल तक आते- आते 
हाथ लगा पछतावा 
  दुनिया से तुमने लिया हमेशा 
क्षण भर के लिए 
 दुनिया को दिया क्या ? 

Monday, 30 January 2012

भ्रष्टाचार



भ्रष्टाचार  है इसका नाम
लोगो को सताना इसका कम,
नये -नये तरीको से मोहित करना इसका कम
माया जाल का इसका रूप
 अन्धकार सा इसका स्वरूप ,
 गरीबो का पेट काटना  इसका धर्म
  अन्याय पर न्याय स्थापित करना इसका कर्म ,
 दुनिया के बच्चे को कुपोषण से प्रभावित करना इसका कम
 शिक्षा को मिटाना इसकी शान ,    
भष्टाचार है इसका नाम 
  लोगो को  सताना इसका काम, 
  गैर क़ानूनी काम काम करना है इनका धर्मं ,
लोगो का वस्त्र हरण करना  इनका कर्म  ,
पानी का कोई रंग नहीं , 
नेताओ को कोई ढंग 
नहीं मजहब को मानते नहीं 
ईमान को यह जानते नहीं
  बम -विस्फोट करवाना इनका कर्म
  पैसे के बल पर सौहरत कमाते  लोगो को ये भूखे मरते 

Sunday, 6 November 2011

आओ जाने जीने का ढंग

 




धरती कहती  कष्टों को सहना सीखो  तुम
धैर्य  आत्म सयंम को धारण करना सीखो तुम 
वृक्ष  देता नित सन्देश हमें  
दूसरो के लिए जीना सीखो तुम ]
झुककर चलना सीखो तुम 
सागर हमे कहते 
वर्ण  भेद को भूल कर 
सामन्जस्य स्थापित करना सीखो तुम 
लोगो की  गलतिओं को क्षमा करना सीखो तुम 
मानवता कहती है  
दीन दुखियो की सहायता करना सीखो तुम 
सूरज कहता है ज्ञान फैलाओ तुम 
अन्धविश्वास  को मिटाओ तुम 
चन्द्रमा की शीतल चांदनी हमे सिखाती
क्रोध को वश   में करो तुम
हवा सिखाती दूसरो को जीवन दो तुम
दूसरो के दुखो को महसूस करो तुम 
प्रकृति कहती है नित समय पर कर्म करो तुम